Wednesday, April 3, 2013

सिकंदर क्या सच में महान था ?

सिकंदर या अलेक्षेन्द्र एक क्रूर और अत्याचारी मकदूनिया का राजा था। उसे केवल साम्राज्य की भूक थी जिसके लिए उसने लाखो के प्राण लिए।
सिकंदर का जन्म मकदून में 356 ईसापूर्व में हुआ था।
बचपन से ही उसे विश्व विजय की चाह थी। उसे अचिल्लेस जो की इलियद नाम की ग्रीक महागाथा का नायक था उसकी तरह बनना था।
सिकंदर बिलकुल अचिल्लेस की तरह युद्ध में अपनी सेना के आगे रहता ।
सिकंदर का पिता फिलिप द्वितीय एक शक्तिशाली राजा था,उसने ग्रीक के कई राज्यों को हराकर एक संघ का निर्माण किया था ।सिकंदर जब 13 वर्ष का था तब उसने अपने पिता की सहयता की थी संघ के कुछ राज्य के बगावत के दौरान।सिकंदर ने भागवत आसानी से दबा दी और वो एक प्रान्त का राज्यपाल बना।
फिलिप ने दूसरी शादी करली जिस कारण सिकंदर और उसकी माँ नाराज हो गयी जिस कारण वे यूनान से मकदून चले गए। इस बिच सिकंदर के कई सौतेले भाई हुए जो यूनान की गद्दी के वारिस होते।
दुबारा संघ के कुछ राज्यों ने बगावत छेद दी और फिलिप की हत्या करा दी।
सिकंदर फ़ौरन यूनान पंहुचा और बगावत फिरसे दबा दी ।
इसके बाद उसने आपने सारे सौतेले भाई बहनों की हत्या करदी साथ ही अपने चचेरे भाइयो को भी नहीं बक्शा ।
बाकि बचे यूनानी राज्यों को संघ में जोड़ सिकंदर ने संघ के सामने विश्वविजय की मुहीम रखी ।
संघ मान गयी और सिकंदर के नेतृत्व में सिकंदर फारस की सेना को हराने चल दिया।
उसके सामने एशिया के कुछ छोटे राज्य थे जिन्हें क्रूरता पूर्व रोंदते हुए वो आगे बड़ा।
फारस की सेना 2.5 लाख की थी और सिकंदर की 40 सहस्त्र(हज़ार) की थी पर उसने फारस को लगातार तिन युधो हराया ।इसका कारन ये नहीं सिकंदर महान था पर फारस का राजा दरस एक कमजोर राजा था ,उसके खुदके साम्राज्य में बड़े हिस्से में उसकी नहीं चलती थी।
फारस जीतने के बाद कई औरतो की अबरू  लूटी गयी ,कई नगर जलाये गए क्यों ?क्युकी इससे पहले फारस यूनान पर दो बार नाकाम हमले कर चूका था सिर्फ इसी का बदला लेने के लिए। कई फारस के मंदिर तोड़े गए वो भी इसीलिए क्युकी सिकंदर उन्हें दूबारा अपने तरीके से बनाना चाहता था ।
326 ईसापूर्व में  सिकंदर भारत की सीमा पर पहोच गया था।
बड़ा अजीब दृश्य था। हजारो 6फुट के  फारसी सेनिक और उनके बीचो बिच 5.6 का सिकंदर जिसके बदन पर मेडुसा के चित्र का कवच था ।
गंधार और अम्बिसर सिकंदर के साथ मिल गए जबकि पुरु ने उससे लड़ने की ठानी ।
युद्ध हुआ और पुरु ने सिकंदर से अपना लोहा मनवाया ।सिकंदर और पुरु के हजारो सेनिक मारे गए। सिकंदर सोच में पड़ गया अगर युद्ध जारी रहा तो उसका बहोत नुकशान होगा इसीलिए सिकंदर ने संधि करली ।
भारतीयों द्वारा इतना कड़े मुकाबले के बाद यूनानी सेनिको ने नन्द से लड़ने से मना कर दिया ।नन्द भले ही बुरा हो पर काफी शक्तिशाली था और पुरु की 15 सहस्त्र के सेना ने ये हाल किया था तो नन्द की 2.5 लाख की सेना तो मिटा ही डालती उन्हें ।
अपनी सेना के विरोध के बाद उसने भारत से जाने की सोची साथ ही उसे अरब पर भी आक्रमण करना था ।
भारत से जाते वक़्त उसने कई नगर उजाड़े।
बेबीलोन अनपी राजधानी पहोचने के बाद उसने नन्द से लड़ने की तयारी शुरू करदी पर संघ और सेना को ये पसंद नहीं आया ।वे भारत जैसे भीम काई शत्रु पर आक्रमण कर सबकुछ गवाना नहीं चाहते थे।
यदि युद्ध होता तो जो धन सिकंदर फारस से जीता था वो यूनान भेजने के बजाये युद्ध में लगादेता और ये नहीं संघ को मंजूर था नहीं सेनिको को , इसीलिए 323 ईसापूर्व में सिकंदर की हत्या करदी गयी और वही दूसरी तरफ उसके एक लौटे बेटे की भी।
उसका साम्राज्य तिन राज्यों में बट गया ।
जो राजा साम्राज्य के पीछे हो वो महान कैसा और इतनो की जान लेने वाला महान योधा नहीं होता।
महान वो है जो सबके दिलो को जीते अगर मारनेवाला महान है तब तो हिटलर को भी महान कहना चाहिए ।

जय माँ भारती

हिन्दू शब्द प्राचीन है

कुछ लोग बोलते फिरते हैं कि हिन्दू शब्द
विदेशियों की देन है।
मित्रो जो कि एक गलत अवधारणा है। हमारे
धर्म मे हिन्दू शब्द का तब से उल्लेख है जब
दूसरे लोग जँगली जीवन जीने को विवश थे।
कुछ उधाहरण देखते है सनातन में हिन्दू शब्द के
बारे में ...
१- ऋग वेद में एक ऋषि का नाम'सैन्धव'
था जो बाद में"हैन्दाव/ हिन्दव"नाम से
प्रचलित हुए
२- ऋग वेद के ब्रहस्पति अग्यम में हिन्दू शब्द
हिमालयं समारभ्य यावत इन्दुसरोवरं ।
तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते ।।
( हिमालय से इंदु सरोवर तक देव निर्मित देश
को हिन्दुस्थान कहते हैं)
३- मेरु तंत्र ( शैव ग्रन्थ) में हिन्दू शब्द
'हीनं च दूष्यत्येव हिन्दु रित्युच्चते प्रिये'
( जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे
हिन्दू कहते हैं)
४- यही मन्त्र शब्द कल्पद्रुम में भी दोहराई
गयी है
'हीनं दूषयति इति हिन्दू'
५-पारिजात हरण में"हिन्दू"को कुछ इस प्रकार
कहा गया है |
हिनस्ति तपसा पापां दैहिकां दुष्टमानसान ।
हेतिभिः शत्रुवर्गं च स हिंदु रभिधियते ।।
६- माधव दिग्विजय में हिन्दू शब्द
यओंकारमंत्रमूला -ढ् पुनर्जन्म दृढाशयः ।
गोभक्तो भारतगुरू र्हिन्दु र्हिंसनदूषकः ॥
( वो जो ओमकार को ईश्वरीय ध्वनी माने,
कर्मो पर विश्वाश करे, गौ पालक,
बुराइयों को दूर रखे वो हिन्दू है )
७- ऋग वेद (८:२:४१) में'विवहिंदु'नाम के
राजा का वर्णन है जिसने ४६००० गाये दान में
दी थी|
विवहिंदु बहुत पराक्रमी और दानी राजा था ऋग
वेद मंडल ८ में भी उसका वर्णन है|
मित्रो उपरोक्त तथ्यो से ये स्पष्ट है कि हमारे
धर्म-ग्रन्थो मे हिन्दू शब्द का उल्लेख बहुत
पहले से है परन्तु हमारे पूर्वज खुद को"धर्म"
या"सनातन-धर्म"के बोलते थे।
जय माँ भारती

ईसा मसीह एक कृष्ण भक्त

मुझे एक दिन एक नए धर्म का पता चला तो में उसके बारे में जानने के लिए उन लोगो के पास गया जो इसे मानते थे। वे थे विदेशी लोग और इस नए धर्म का नाम नहीं है अबतक ।मैं ISKCON के मंदिर गया क्युकी ये लोग वाही मिलेंगे ।
इस नए धर्म के लोग ज्यादा से ज्यादा 100 के आसपास होंगे वे ज्यादा नहीं है। चलिए में बताता हु इस नए धर्म के बारे में ।इसाई मानते है उनके तिन देवता होते है उन्हें वे Trinity कहते है। वे तिन देवता है The Holy Spirit,The Father और The Son ।Son ईसा है और इस नए धर्म को मानने वाले कहते है Father भगवन कृष्ण है और The holy spirit भगवन विष्णु।
वे कहते है ईसा मसिह असल में कृष्ण भक्त है ।
मैंने पड़ताल की और कई हैरतभरी बात सामने आई।
ईसा का जन्म 25 December में नहीं हुआ था बल्कि कोई नहीं जानता।सच्चाई ये है की सबसे पुराणी Bible में ऐसा कही नहीं लिखा है।
दूसरी बात ईसा की मृत्यु के तिन दिन बाद वह जिन्दा नहीं हुआ था ये तो चर्च ने बाइबिल मेंदाल दिया।
अब आप सोचेंगे की इससे उस धर्म का क्या लेना देना ? पर सच में है और साथ में ये ईसा के अस्तित्व पर भी सवाल उठता है पर ये सही नहीं है।
बात ये है की ईसा जन्म से मसीह नहीं था कोई भी उसके बचपन के बारे में नहीं जानता इसीलिए Bible में इसा के बचपन के बारे में कुछ नहीं है। ईसा एक आम बच्चा था उसे एक दिन कृष्ण के बारे में पता चला और वो भारत आ गया। यहाँ उसने कई वर्ष साधना की और एक दिन उसे कृष्ण ने दर्शन दिए साथ ही लोगो की भलाई का काम सोप।उस दिन से ईसा का नाम इसा या येसु कृष्णदास पड़ा ।
अपने नगर आकर उसने प्रचार किया पर उसके कुछ कट्टर भक्तो कप ये नहीं पसंद आया की कोई विदेशी भगवन उनका भगवन बने इसीलिए इसा की मृत्यु के बाद इसा को लोग क्राइस्ट कहने लगे कृष्णदास छुपाने हेतु।
उसके तिन दिन बाद पुनः जीवित होने की बाद चर्च ने फैलाई ताकि लोग उसे सचमे मसिह समझे और उसका कल चुप जाये।
जय माँ भारती

Tuesday, April 2, 2013

भारत का अर्थ

एक बार मैं TV पर महाभारत देख रहा था ।तब मेरी दादी ने मुझसे पूछा की भारत देश को भारत नाम कैसे पड़ा ? मैंने कहा मुझे नहीं पता ।
तब उन्होंने कहा क्युकी सम्राट भरत ने जब पूरा भारत जीता तब उनके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा ।
में सोच में पड़ा भ भा कैसे हुआ ,इसका उत्तर वे भी नहीं जानती थी पर कई वर्षो के शोद के बात अब मैं आपको भारत का अर्थ बताऊंगा ।
भा = भारत के वंश के या भारत के देश के लोग
रत = रास्त्र या राज्य
इसका अर्थ है भारत के वंशो का या भारत के लोगो का देश।
इसका एक उद्धरण है मराठा
मराठा का अर्थ है
महा = महान या Great
राठा = ये सब्द रत है ,वक़्त के साथ बदल गया,इसका अर्थ राज्य
इसीलिए प्राचीन समय में महारास्त्रका नाम था महाराष्ट्र का और यही वजह है की आज भी इसका यही नाम है।
मैंने कई पुस्तक पड़ी पर एक ही बात जानी की हमारे इतिहास से छेद छड हुई है तो उसी पर विश्वास करे जो आपके मन को सही लागे।
जय माँ भारती