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Thursday, May 15, 2014

मुहम्मद कल्कि नहीं

मुल्लों ने
पुराणो का सहारा लेके मुहम्मद को कल्कि अवतार
सिद्ध करने की कोशिस की है |
उन्होंने अपने लेख "हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) और
भारतीय
धर्मग्रन्थ -१"में कहा है की भविष्य पुराण के अनुसार
कल्कि अवतार जो की अंतिम अवतार माना जाता है
वो मुहम्मद के रूप में हो चुका है | उन्होंने जैन और
बौध
धर्म
का भी उदहारण दिया है और कहा है की इन धर्मो के
अनुसार भी मुहम्मद आखरी अवतार है |
अब इससे हास्यपद बात और क्या हो सकती है
की बौध
धर्म जो अवतार वाद के खिलाफ है यहाँ तक
की वो ब्रह्मा , विष्णु , महेश तक को ईश्वर
का अवतार
नहीं मानता, तो भला मुहम्मद को कैसे अवतार घोषित
कर सकता है?,
हाँ बुद्धिस्ट कालचक्र तंत्र को सही मानते
हो तो इसमें
सम्भल जिलेके २५ राजा के जन्म का जिक्र है वो२३३७
में
होगा जिसका नाम कुलिक होगा और जिसके हाथ में
तलवार नहीं बल्कि कालचक्र होगा पर मुहम्मद के हाथ
में
तलवार थी |
भगवत महा पुराण के अनुसार कल्कि का जन्म भारत
के
सम्भल जिले में होगा पर मुहम्मद का जन्म तो अरब
के
रेगिस्तान में हुआ था , अब अरब के रेगिस्तान और
सम्भल
में क्या समानता हो सकती है...?
कल्कि का जन्म कब होगा उसके बारे में कहा गया है
"द्वादश्यां शुक्ल-पक्षस्य माधवे मासि माधवम्"-
कल्कि पुराण ,१:२:१५ , यानि कल्कि का जन्म १२
मार्च को होना निश्चित किया गया है पर मुहम्मद
साहब का जन्म २० अप्रैल ५७१ को हुआ | यूँ तो कई
सारी भिन्तायें गिनवा सकती हूँ वो भी सबूत के साथ
जो ये साबित कर देंगी की जाकिर नायक रट्टू तोते
के आलावा कुछ नहीं हैं |
पर चलिए मैं जाकिर नायक की बात को थोड़ी देर के
लिए सही मान लेती हूँ, मान लेती हूँ की भविष्य पुराण
में मुहम्मद का जिक्र है पर वो जिक्र कैसा है ये आप
खुद
ही देख लीजिये | भविष्य पुराण -प्रति सर्ग ३:३
-५-७-२४-२७ में त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का जिक्र
आया है जिसे शंकर जी ने संहार कर
दिया था वो मरुस्थल में महामाद नाम के राक्षस के
रूप
में जन्म लेगा और पैसचिक धर्म स्थापित करेगा | अब
अगर
जाकिर नायक भविष्य पुराण की बात मानते हैं
तो इन्हें ये भी मानना चाहिए की मुहम्मद साहब
वही महामाद है जिसका जिक्र भविष्य पुराण में
त्रिपुरासुर नाम के राक्षस के रूप में है उनके
व्यक्तित्व
और
कृतित्व से महामाद/ त्रिपुरासुर का प्रोफाइल बिल्कुल
मिलता जुलता है. यदि वे ज़िंदा होते तो इतने बड़े नर-
संहार और नाबालिग बच्चियों के शील हरण के आरोप
में
अंतरराष्ट्रीय अदालत से कठोरतम सज़ा पा चुके होते.
अब में मुहम्मद के जीवन का चित्रण करति हु मेने
उसमे
शाक्ष्य भी दिए है ताकि कोई मुल्ला ये ना कह सके
कि ये सब झूट है ।